दशहरा उत्सव पर प्रदेशभर से उमड़ते हैं भक्त, आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है देवस्थान
प्रदीप साहू, Khategaon Ki News: हरणगांव। देवास जिले के अंतिम छोर पर स्थित दूरस्थ आदिवासी अंचल हरणगांव में भगवान देवनारायण भीलट देवस्थान पर मां जगदंबे की आराधना प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ जारी है। नवरात्रि के पावन अवसर पर देवस्थान में हवन, पूजन, आरती सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। यहां मां जगदंबे और भीलट देव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था देखने को मिलती है। तीन दिवसीय विजयदशमी उत्सव एवं दशहरा पर्व के दौरान प्रदेश के विभिन्न शहरों और दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।

मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाते हैं प्रसाद
देवनारायण भीलट देवस्थान क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु देवस्थान पहुंचकर दर्शन करते हैं और प्रसाद अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। दशहरा उत्सव के दौरान यहां भक्तों की विशेष भीड़ रहती है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतान सुख की कामना लेकर देवस्थान पहुंचते हैं।
असाध्य रोगों से मुक्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु
देवस्थान के प्रति लोगों की गहरी आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभिन्न प्रकार की बीमारियों से पीड़ित लोग भी यहां दर्शन और प्रार्थना के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालु भीलट देव के दरबार में अपनी पीड़ा दूर होने और बेहतर स्वास्थ्य की कामना करते हैं। वहीं, संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपती भी अपनी मनोकामना लेकर यहां आते हैं। देवस्थान से जुड़ी मान्यता के अनुसार, अब तक 1014 दंपतियों को संतान सुख प्राप्त हुआ है। यह संख्या देवस्थान से जुड़े लोगों द्वारा बताई गई है।
श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहते हैं पड़ियार सीताराम
दशहरा उत्सव के दौरान दूर-दराज से आने वाले भक्तों की सेवा और व्यवस्था में पड़ियार सीताराम बारबाल सहित अन्य सेवाभावी लोग जुटे रहते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक आयोजनों को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में उनका योगदान रहता है। मां जगदंबे की आराधना, धार्मिक अनुष्ठानों और भीलट देव के प्रति अटूट विश्वास के चलते हरणगांव का यह देवस्थान न केवल स्थानीय आदिवासी अंचल, बल्कि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।
आस्था, विश्वास और परंपरा का संगम
प्राकृतिक परिवेश से घिरे हरणगांव के इस देवस्थान पर नवरात्रि और दशहरा उत्सव के दौरान भक्तिमय वातावरण रहता है। मां जगदंबे की आराधना, हवन-पूजन और आरती के बीच श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा और श्रद्धालुओं के विश्वास ने देवनारायण भीलट देवस्थान को क्षेत्र की विशिष्ट धार्मिक पहचान प्रदान की है।







