गुरुदेव दादाभाई के सानिध्य में हुआ कन्या पूजन, भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण की महाप्रसादी

प्रदीप साहू, Khategaon Ki News: मां भगवती की आराधना, वैदिक मंत्रोच्चार और हवन में समर्पित आहुतियों के साथ नवरात्रि के पावन अवसर पर श्री दादाजी धूनीवाला दरबार, श्यामला हिल्स भोपाल में आयोजित 208वें शतचंडी महारुद्र यज्ञ का दुर्गा नवमी के दिन विधिवत समापन हुआ। परम पूज्य साधक संत गुरुदेव दादाभाई के पावन सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में भक्तों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना और धार्मिक अनुष्ठानों से आश्रम परिसर भक्तिमय बना रहा। दुर्गा नवमी के अवसर पर यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ नौ दिवसीय साधना एवं आराधना का समापन हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने हवन कुंड में आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की।
शतचंडी महारुद्र यज्ञ का विशेष धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में शतचंडी महायज्ञ को मां दुर्गा की आराधना का अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। इसमें देवी महात्म्य यानी दुर्गा सप्तशती के पाठ, मंत्रोच्चार और वैदिक विधि-विधान के माध्यम से मां भगवती की उपासना की जाती है। वहीं, महारुद्र यज्ञ भगवान शिव की आराधना और लोकमंगल की भावना से जुड़ा अनुष्ठान है। शतचंडी और महारुद्र यज्ञ का संयुक्त आयोजन शक्ति और शिव की उपासना का विशेष आध्यात्मिक संगम माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे यज्ञों का उद्देश्य वातावरण में सकारात्मकता का संचार करना, मन में श्रद्धा और सद्भाव जगाना तथा परिवार, समाज और समस्त संसार के कल्याण की प्रार्थना करना है। यज्ञ में आहुति अर्पित करना त्याग, समर्पण और सेवा भावना का प्रतीक है। पूर्णाहुति के साथ श्रद्धालु अपने संकल्पों को पूर्ण करते हुए ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
कन्या पूजन में मां दुर्गा के स्वरूप का सम्मान
दुर्गा नवमी के अवसर पर गुरुदेव दादाभाई द्वारा कन्याओं का पूजन किया गया। नवरात्रि में कन्या पूजन को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। सनातन परंपरा में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
कन्या पूजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान, पवित्रता, करुणा और मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर भी है। कन्याओं के चरण पूजन, तिलक, भोजन और उपहार अर्पित करने के माध्यम से मां भगवती के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है। यह परंपरा समाज को बालिकाओं के सम्मान, उनकी सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी देती है।
खातेगांव से पहुंचे श्रद्धालुओं ने की सहभागिता।
208वें शतचंडी महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर खातेगांव से श्री दादाजी सेवा भक्त मंडल, अन्नपूर्णा मंडल एवं श्री दादाजी परहित सेवा संस्थान से जुड़े अनेक श्रद्धालु भोपाल पहुंचे। सभी ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर गुरुदेव दादाभाई का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर बालकृष्ण बिश्नोई, अमृतलाल बागबान, व्यापारी प्रकोष्ठ के सुनील अग्रवाल, प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रदीप साहू सहित श्री दादाजी परहित सेवा संस्थान भोपाल से जुड़े गोविंद , राजेश गुप्ता,ओम दीवान तथा बड़ी संख्या में भक्त एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी
यज्ञ की पूर्णाहुति और कन्या पूजन के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भोजन प्रसादी ग्रहण की। पूरा आश्रम परिसर जय श्री दादाजी की और मां भगवती के जयकारों से भक्तिमय बना रहा। इस धार्मिक आयोजन ने श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा, समर्पण और सामाजिक सद्भाव की भावना से जोड़ने का संदेश दिया। नवरात्रि के समापन पर आयोजित यज्ञ, कन्या पूजन और भंडारे के माध्यम से मां भगवती के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए सभी के सुख, शांति और कल्याण की कामना की गई।




